अतुल ठाकुर
भीगी भीगी रातों में…
किशोरकुमार…एक आकलन
कोई होता जिसको अपना, हम अपना कह लेते यारों
अविस्मरणीय गाणी, विस्मृत चेहरे – तुम कितनी खुबसूरत हो, ये मेरे दिल से पूछो…